चंद्र कहूँ, तौ बनत ना - ब्रज के दोहे

चंद्र कहूँ, तौ बनत ना - ब्रज के दोहे

चंद्र कहूँ, तौ बनत ना, होत दिवस दुति छीन ।
कमल बदन उपमा दिएं, निसि बिकास ते हीन ॥

- ब्रज के दोहे

श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं - आपको चंद्रमा कहूँ तो कैसैं कहूँ? ये दिन में प्रकाशहीन रहता है। कमल कहूँ तो कैसैं कहूँ क्योंकि यह रात्रि में अपना मुख बंद कर लेता है । हे प्यारी बृषभानुजा! आपके मुख का प्रकास तो छिन छिन बढ़ता ही रहता है।