रूप की राशि किशोरी मोहिनी मन हरयौ है ।
तीखी चितवन मुस्क्यान छबीली, टौना सौ कछु करयौ है ॥ [1]
कुटिल अलक कल बिंदु चिबुक पर, प्रान गन लै धरयौ है ।
नासा चढ़न बदन ऐडी की, अंग छैल छक भरयौ है ॥ [2]
घूमत लाल हिलग सहचर गन, लखि घायल ह्वै परयौ है ।
जै श्री बंसी अलि ललिता सर्वस्व सुखरास असन ही टरयौ है ॥ [3]
- श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (118)
रूप की राशि किशोरी मोहिनी श्री राधा ने मन को मोह लिया है। उनके नेत्रों में कृपाण की तीव्र धार है और मनोहारिनी मुस्कान जादू सा कुछ करती है। [1]
उनकी घुंघराली अलकें और ठोड़ी पर तिल ने तो मानो प्राणों को ही ले लिया है। उनकी तीखी नासिका और चरणों की ऐड़ी के वक्र की सुंदरता अद्भुत है और उनके हर अंग में माधुरी भरी हुई है। [2]
उनकी रूप की माधुरी को निहार कर श्यामसुंदर और सहचरियाँ झूमते हुए फिरते हैं और घायल होकर ज़मीन पर गिर जाते हैं। श्री वंशी अलि जी कहते हैं कि ललिता सखी का सर्वस्व श्री राधा ही हैं, जो समस्त सुखों की राशि हैं और जिनके प्रेम में वे सदा मतवारी बनी रहती हैं। [3]
तीखी चितवन मुस्क्यान छबीली, टौना सौ कछु करयौ है ॥ [1]
कुटिल अलक कल बिंदु चिबुक पर, प्रान गन लै धरयौ है ।
नासा चढ़न बदन ऐडी की, अंग छैल छक भरयौ है ॥ [2]
घूमत लाल हिलग सहचर गन, लखि घायल ह्वै परयौ है ।
जै श्री बंसी अलि ललिता सर्वस्व सुखरास असन ही टरयौ है ॥ [3]
- श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (118)
रूप की राशि किशोरी मोहिनी श्री राधा ने मन को मोह लिया है। उनके नेत्रों में कृपाण की तीव्र धार है और मनोहारिनी मुस्कान जादू सा कुछ करती है। [1]
उनकी घुंघराली अलकें और ठोड़ी पर तिल ने तो मानो प्राणों को ही ले लिया है। उनकी तीखी नासिका और चरणों की ऐड़ी के वक्र की सुंदरता अद्भुत है और उनके हर अंग में माधुरी भरी हुई है। [2]
उनकी रूप की माधुरी को निहार कर श्यामसुंदर और सहचरियाँ झूमते हुए फिरते हैं और घायल होकर ज़मीन पर गिर जाते हैं। श्री वंशी अलि जी कहते हैं कि ललिता सखी का सर्वस्व श्री राधा ही हैं, जो समस्त सुखों की राशि हैं और जिनके प्रेम में वे सदा मतवारी बनी रहती हैं। [3]

