हस्तमुत्क्षिप्य यातोसि बलात्कृष्ण किमद्भुतम् ।
हृदयाद्यदि निर्यासि पौरुषं गणयामि ते ॥
- श्री बिल्वमंगल, श्री कृष्ण कर्णामृतम (3.97)
हे कृष्ण, यह कौन सी बड़ी बात है कि तुम जबरदस्ती मेरा हाथ छुड़ा कर चले गये, मर्दानगी तो तुम्हारी मैं तब मानूँगा यदि मेरे ह्रदय से निकल कर दिखाओ ।
हृदयाद्यदि निर्यासि पौरुषं गणयामि ते ॥
- श्री बिल्वमंगल, श्री कृष्ण कर्णामृतम (3.97)
हे कृष्ण, यह कौन सी बड़ी बात है कि तुम जबरदस्ती मेरा हाथ छुड़ा कर चले गये, मर्दानगी तो तुम्हारी मैं तब मानूँगा यदि मेरे ह्रदय से निकल कर दिखाओ ।

