जे पद शिव ब्रह्मादिक दुर्लभ, शारद उमा रमा री ।
रसिक मरम जानत तिन पद रज, सुलभ करावन हारी ॥
- ब्रज के दोहे
जिनके चरणों को प्राप्त करना शिव, ब्रह्मा, सरस्वती, पार्वती एवं लक्ष्मी आदि के लिए भी अत्यंत दुर्लभ है, उन श्री राधा के चरणों की रज (अर्थात् वृंदावन की रज) की महिमा को केवल रसिक संत जानते हैं। इसी रज की कृपा से श्री राधिका के चरण सुलभता से प्राप्त हो जाते हैं।
रसिक मरम जानत तिन पद रज, सुलभ करावन हारी ॥
- ब्रज के दोहे
जिनके चरणों को प्राप्त करना शिव, ब्रह्मा, सरस्वती, पार्वती एवं लक्ष्मी आदि के लिए भी अत्यंत दुर्लभ है, उन श्री राधा के चरणों की रज (अर्थात् वृंदावन की रज) की महिमा को केवल रसिक संत जानते हैं। इसी रज की कृपा से श्री राधिका के चरण सुलभता से प्राप्त हो जाते हैं।

