कै खानों कै सोवनौं - श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (13)

कै खानों कै सोवनौं - श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (13)

कै खानों कै सोवनौं,  कै नित्य उठि करत बिगार।
श्रीनागरीदासि अनन्य प्रभु, भजि तजि मन जंजार॥

- श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (12)

हे भाई, तुम अपने समय को केवल खाने/पीने, सोने पुन: उठने में ही व्यतीत कर रहे हो, तुम यह बात स्पष्टता से समझ लो कि प्रभु का मन से अनन्य एवं नित्य भजन किए बिना, इस संसार रूपी जंजाल को तुम नहीं तोड़ सकते।