(राग विहागरौ)
स्यामा नित्य बिहार बनी ।
नित्य बना श्री कुंजबिहारी, ताके रसहि सनी ॥ [1]
अंग अंग आभूषण अभरन, वारौं नील मनी ।
रसिक रूप हरिदासि कृपा बल, बिपुल बिनोद भनी ॥ [2]
- श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (673)
मेरी श्यामा जू नित्य विहार में अति शोभायमान हैं । उनके संग नित्य ही कुंज बिहारी भी शोभायमान हैं जो श्री श्यामा जू के रस में सदा मगन रहते हैं । [1]
उनके अंग अंग पर सजे आभूषणों पर नील मणि को न्यौच्छावर कर देना चाहिए । श्री रूप सखी जी कहते हैं कि रसिक शिरोमणि स्वामी हरिदास जू की कृपा बल से वे भी नित्य विहार रूपी अगाध रस में उन्मत्त रहते हैं । [2]
स्यामा नित्य बिहार बनी ।
नित्य बना श्री कुंजबिहारी, ताके रसहि सनी ॥ [1]
अंग अंग आभूषण अभरन, वारौं नील मनी ।
रसिक रूप हरिदासि कृपा बल, बिपुल बिनोद भनी ॥ [2]
- श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (673)
मेरी श्यामा जू नित्य विहार में अति शोभायमान हैं । उनके संग नित्य ही कुंज बिहारी भी शोभायमान हैं जो श्री श्यामा जू के रस में सदा मगन रहते हैं । [1]
उनके अंग अंग पर सजे आभूषणों पर नील मणि को न्यौच्छावर कर देना चाहिए । श्री रूप सखी जी कहते हैं कि रसिक शिरोमणि स्वामी हरिदास जू की कृपा बल से वे भी नित्य विहार रूपी अगाध रस में उन्मत्त रहते हैं । [2]

