भरोसो इन चरणन को मेरे - श्री शीतलदास जी

भरोसो इन चरणन को मेरे - श्री शीतलदास जी

भरोसो इन चरणन को मेरे ।
जिन चरणन की रज की वाँछा, ब्रह्मा करी घनेरे ॥ [1]
शुक मुनि व्यास प्रंशसा कीनी, उद्धव संत हु मांगी ।
सोई चरण श्री गुरु प्रताप ते, सेवत सखी सभागी ॥ [2]

- श्री शीतल दास जी

श्री राधा के युगल चरणों पर ही मेरा अनन्य एवं अटूट विश्वास है। जिनके श्री चरणों की रज की वांछा स्वयं ब्रह्मा भी करता रहता है। [1]

शुकदेव मुनि और व्यास जी ने उनके श्री चरणों की रज की महिमा का गान किया है और उद्धव जैसे संतों ने उसे प्राप्त करने की इच्छा की है। ऐसे दुर्लभ श्री राधा के चरणों की सेवा परम सौभाग्यशाली सखियाँ सदा करती हैं, जिसे किसी सखी भावापन्न रसिक गुरु की कृपा से ही प्राप्त किया जा सकता है। [2]