राधा प्यारी स्वामिनी, निज सहचरि सुखदाय ।
अली माधुरी आपके, चरन परी विल्लाय ॥
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली
हे प्यारी श्री राधा स्वामिनी जू! आप तो सदा अपनी निज सहचरियों को सुख प्रदान करने वाली हो, अली माधुरी आपके चरणों की शरण में पड़ी, आपसे कृपा की याचना कर रही है ।
अली माधुरी आपके, चरन परी विल्लाय ॥
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली
हे प्यारी श्री राधा स्वामिनी जू! आप तो सदा अपनी निज सहचरियों को सुख प्रदान करने वाली हो, अली माधुरी आपके चरणों की शरण में पड़ी, आपसे कृपा की याचना कर रही है ।

