राधे तैं प्रीतम बस कीनौ।
अखिल लोक को जो मोहत है, ताको मन हर लीनौ ॥ [1]
कमला चरण पलोटन वांछत, सो तेरे रंग भीनौ।
अंग-अंग सिंगार साजिके, पाँय महावर दीनौ ॥ [2]
जोवत तो मुखचन्द्र सलोनो, रहत सदा आधीनौ ।
‘छौना सखी’ सरबस दे पायो प्रेम प्रीति रस झीनौ ॥ [3]
- श्री गुरुछौना जी
हे श्री राधे! प्रीतम श्री कृष्ण को तुमने अपने वशीभूत कर लिया है । जो अखिल लोक के चूड़ामणि भगवान श्री कृष्ण सबके मन को मोहित करते हैं, उनके मन का हरण भी आपने कर लिया है । [1]
जो महालक्ष्मी श्री कृष्ण के चरणों को पलोटने (दबाने) की वाँछा बनाये रखती हैं, वे श्री कृष्ण सदा आपके प्रेम रंग में रंगे हुए रहते हैं । वे आपके अंगों का श्रृंगार अपने हस्त कमलों से करते हैं और आपके श्री चरणों में महावर लगाकर आपके चरणों की सेवा करते हैं । [2]
यदि कहीं प्रियतम आपके सुंदर मुख चन्द्र के दर्शन कर लें, तो सदा आपके आधीन रहते हैं । श्री गुरु छौना जी कहते हैं उन्होंने अपना सर्वस्व लुटा कर आपका दिव्य प्रेम रस प्राप्त किया है । [3]
अखिल लोक को जो मोहत है, ताको मन हर लीनौ ॥ [1]
कमला चरण पलोटन वांछत, सो तेरे रंग भीनौ।
अंग-अंग सिंगार साजिके, पाँय महावर दीनौ ॥ [2]
जोवत तो मुखचन्द्र सलोनो, रहत सदा आधीनौ ।
‘छौना सखी’ सरबस दे पायो प्रेम प्रीति रस झीनौ ॥ [3]
- श्री गुरुछौना जी
हे श्री राधे! प्रीतम श्री कृष्ण को तुमने अपने वशीभूत कर लिया है । जो अखिल लोक के चूड़ामणि भगवान श्री कृष्ण सबके मन को मोहित करते हैं, उनके मन का हरण भी आपने कर लिया है । [1]
जो महालक्ष्मी श्री कृष्ण के चरणों को पलोटने (दबाने) की वाँछा बनाये रखती हैं, वे श्री कृष्ण सदा आपके प्रेम रंग में रंगे हुए रहते हैं । वे आपके अंगों का श्रृंगार अपने हस्त कमलों से करते हैं और आपके श्री चरणों में महावर लगाकर आपके चरणों की सेवा करते हैं । [2]
यदि कहीं प्रियतम आपके सुंदर मुख चन्द्र के दर्शन कर लें, तो सदा आपके आधीन रहते हैं । श्री गुरु छौना जी कहते हैं उन्होंने अपना सर्वस्व लुटा कर आपका दिव्य प्रेम रस प्राप्त किया है । [3]

