श्री वृषभानुकुमारि के, पग बंदौ कर जोर ।
जे निसि वासर उर धरैं, ब्रज वसि नंद-किसोर ॥
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (1)
मैं दोनों हाथ जोड़ कर वृषभानु नंदिनी श्री राधा के चरणों का वंदन करता हूँ क्योंकि जिनके ह्रदय में, दिन-रात, उनके चरण बसते हैं वे श्री कृष्ण के संग ब्रज का वास प्राप्त करते हैं (अथवा उन्हें श्री कृष्ण ब्रजवास देते हैं)।
जे निसि वासर उर धरैं, ब्रज वसि नंद-किसोर ॥
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (1)
मैं दोनों हाथ जोड़ कर वृषभानु नंदिनी श्री राधा के चरणों का वंदन करता हूँ क्योंकि जिनके ह्रदय में, दिन-रात, उनके चरण बसते हैं वे श्री कृष्ण के संग ब्रज का वास प्राप्त करते हैं (अथवा उन्हें श्री कृष्ण ब्रजवास देते हैं)।

