जो तेरे घट प्रेम है तो कहि-कहि न सुनाव - श्री मलूक दास

जो तेरे घट प्रेम है तो कहि-कहि न सुनाव - श्री मलूक दास

जो तेरे घट प्रेम है, तो कहि-कहि न सुनाव।
अंतरजामी जानि है, अंतरगत का भाव॥

- श्री मलूक दास

यदि तुम्हारे अंदर प्रेम है तो तुम कदापि उसको बतलाकर सुनाओगे नहीं । भगवान अंतर्यामी हैं, वे सबके ह्रदय की बात को जानते हैं, तुम्हें किसी से कहने की ज़रूरत नहीं है ।