आवति कुँवरि गज मद गति मंथर - श्री हित कल्याण पुजारी जी की वाणी (65)

आवति कुँवरि गज मद गति मंथर - श्री हित कल्याण पुजारी जी की वाणी (65)

आवति कुँवरि गज मद गति मंथर,
पिय कैं सकल मनोरथ दैंन । [1]
प्रेमरूप-रस-रासि किशोरी,
भृकुटि-विलास नचावति मैंन ॥ [2]
गौर-स्याम अँग-अंगनि विलसत,
उपजत कोटि-कोटि सुख दैंन । [3]
नुपुर-किंकिनि की धुनि सुनि-सुनि,

रोम-रोम श्रुति-नैंन ॥ [4]
- श्री कल्याण पुजारी जी, श्री हित कल्याण पुजारी जी की वाणी (65)

प्रियतम श्यामसुन्दर के समस्त मनोरथ को पूर्ण करने के लिए, श्री किशोरीजी (श्री राधा) मदमस्त हाथी की गति से झूमते हुए आ रही हैं । [1]

श्री किशोरीजी प्रेम, रूप एवं रस की राशि हैं जो अपने भृकुटी के विलास से मदन को नचाती हैं । [2]

श्री राधा कृष्ण के गौर साँवले अंगों से कोटि कोटि सुख देने वाले नवीन कौतिक उदित होते हैं । [3]

श्री कल्याण पुजारी जी कहते हैं कि राधिका के नूपुर एवं किंकनी की धुन को सुनकर सहचरियों के रोम-रोम कान और नेत्र ही बन जाते हैं । [4]