सुमिरन राधा नाम को, सब सारन को सार ।
‘रामू’ जो निशिदिन रटै, पावै नित्य विहार ॥
- श्री रामूदास जी (शुक संप्रदाय के रसिक भक्त)
श्री राधा नाम का सुमिरन करना समस्त सारों का सार है। श्री रामूदास जी कहते हैं कि जो व्यक्ति नित्य राधा नाम का रटन करता है, वह नित्य विहार रस को प्राप्त कर लेता है।
‘रामू’ जो निशिदिन रटै, पावै नित्य विहार ॥
- श्री रामूदास जी (शुक संप्रदाय के रसिक भक्त)
श्री राधा नाम का सुमिरन करना समस्त सारों का सार है। श्री रामूदास जी कहते हैं कि जो व्यक्ति नित्य राधा नाम का रटन करता है, वह नित्य विहार रस को प्राप्त कर लेता है।

