वानी पाती प्रेमकी, व्यौरौ लिख्यौ बनाइ - श्री वृंदावन दास चाचा जी

वानी पाती प्रेमकी, व्यौरौ लिख्यौ बनाइ - श्री वृंदावन दास चाचा जी

वानी पाती प्रेमकी, व्यौरौ लिख्यौ बनाइ ।
बाँच बूझिकै जो चलै, प्रियतम के घर जाइ ॥

- श्री वृंदावन दास चाचा जी

रसिक संतों द्वारा रचित वाणियाँ प्रेम के द्वारा भेजी हुई वह पाती (पत्री) है जिसमें सब बातें विस्तार पूर्वक लिखी हुई हैं । इस पाती को पढ़कर और समझकर जो चलते हैं, वे प्रियतम के घर अवश्य पहुँचते हैं ।