(राग मलार)
छबि-निधि बिहरत प्रीतम-प्यारी ।
सघन घटा बरखत जल निरखत, बिपिन-भूमि हरियारी ॥ [1]
परम प्रबीन बीन कर लैके, ललित मलार उचारी ।
सुखमा निरखि किसोरी-बर की, भई अलिगन बलिहारी ॥ [2]
- श्री किशोरी अलि
सुंदरता की निधि, श्री प्रीतम प्यारी (श्री राधा कृष्ण), वृंदावन में विचरण कर रहे हैं। वे सघन बादलों से बरसते हुए जल और वृंदावन के हरे-भरे वनों को निहार रहे हैं। [1]
इतने में, परम प्रवीण श्री ललिता जू अपने हाथ में वीणा लिए, राग मलार का गान करने लगीं। आनंद में मग्न प्रिया-प्रियतम की सुंदरता को देख सखियाँ अपने आप को न्यौछावर कर देती हैं। [2]
छबि-निधि बिहरत प्रीतम-प्यारी ।
सघन घटा बरखत जल निरखत, बिपिन-भूमि हरियारी ॥ [1]
परम प्रबीन बीन कर लैके, ललित मलार उचारी ।
सुखमा निरखि किसोरी-बर की, भई अलिगन बलिहारी ॥ [2]
- श्री किशोरी अलि
सुंदरता की निधि, श्री प्रीतम प्यारी (श्री राधा कृष्ण), वृंदावन में विचरण कर रहे हैं। वे सघन बादलों से बरसते हुए जल और वृंदावन के हरे-भरे वनों को निहार रहे हैं। [1]
इतने में, परम प्रवीण श्री ललिता जू अपने हाथ में वीणा लिए, राग मलार का गान करने लगीं। आनंद में मग्न प्रिया-प्रियतम की सुंदरता को देख सखियाँ अपने आप को न्यौछावर कर देती हैं। [2]

