गुरुछौना रज सेइये, धार मतो मजबूत ।
रज रज हो रज मिलै, सो साँचों रजपूत ॥
- श्री गुरुछौना जी
सच्चा राजपूत तो वे है जो सदा वृंदावन की रज का सेवन करता है एवं वृंदावन की रज में रज होकर मिलने की मजबूत मत रखता है।
रज रज हो रज मिलै, सो साँचों रजपूत ॥
- श्री गुरुछौना जी
सच्चा राजपूत तो वे है जो सदा वृंदावन की रज का सेवन करता है एवं वृंदावन की रज में रज होकर मिलने की मजबूत मत रखता है।

