जुगल बिहारी दीजिए श्रीवृंदावन वास - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (9)

जुगल बिहारी दीजिए श्रीवृंदावन वास - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (9)

जुगल बिहारी दीजिए, श्रीवृंदावन वास ।
रूपसुधारस पियन को, लोचन मरत पियास ॥

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय श्रृंगार शतक (9)

हे युगल बिहारी (श्री राधा कृष्ण), मुझे श्री वृंदावन का वास प्रदान कीजिए क्योंकि मेरे प्यासे नेत्र तुम्हारे रूप सुधा रस का पान करने के लिए मरे जा रहे हैं।