त्वमप्येनां समाश्रित्य राधिकां मम वल्लभाम् ।
जपन्मे युगलं मंत्रं सदा तिष्ठ मदालये ॥
- पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 82 (वृंदावन महिमा), छंद (88)
भगवान कृष्ण कहते हैं - हे शिव! अत: आपको भी मेरी प्रिया श्री राधा की शरण लेनी चाहिए, सदा मेरे युगल मंत्र का जाप करना चाहिए, और मेरे धाम वृंदावन में रहना चाहिए।
जपन्मे युगलं मंत्रं सदा तिष्ठ मदालये ॥
- पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 82 (वृंदावन महिमा), छंद (88)
भगवान कृष्ण कहते हैं - हे शिव! अत: आपको भी मेरी प्रिया श्री राधा की शरण लेनी चाहिए, सदा मेरे युगल मंत्र का जाप करना चाहिए, और मेरे धाम वृंदावन में रहना चाहिए।

