(कवित्त)
राज के भरोसे कोऊ, काज के भरोसे कोऊ,
साज के भरोसे कोऊ, कोऊ वर वानी के। [1]
देह के भरोसे कोऊ, गेह के भरोसे कोऊ,
नेह के भरोसे कोऊ, कोऊ गुरु ज्ञानी के॥ [2]
नाम के भरोसे कोऊ, ग्राम के भरोसे कोऊ,
दाम के भरोसे कोऊ, कीरति-कहानी के।
ब्रज है भरोसे सदा स्याम ब्रजराज के तो,
“फलक” भरोसे एक राधा व्रजरानी के॥ [4]
- श्री नबी बख्श ‘फलक’ (मुस्लिम भक्त)
संसार में कोई राजा के भरोसे है तो कोई अपने कार्य (कर्म) के भरोसे निश्चिन्त है। कोई अपने साज-श्रृंगार के भरोसे है, कोई सुरीली वाणी के। [1]
कोई अपने शरीर के भरोसे है अथवा बलिष्ठ शरीर के भरोसे बैठा है तो कोई भवन-कोठी के भरोसे। किसी को अपने प्रेम या स्नेही पर भरोसा है और किसी को ज्ञानी गुरु पर। [2]
इसी प्रकार कोई अपने नाम से ही आश्वस्त है तो कोई ग्राम से, जबकि किसी को धन पर विश्वास है तो किसी को अपने यश-कीर्ति की कथा पर। [3]
ब्रजधाम सदैव ब्रजराज श्री कृष्ण पर भरोसा रहा है, परंतु नबी बख्श "फलक' कहते हैं कि उन्हें तो एक मात्र ब्रजरानी श्री राधिका जू पर ही भरोसा है (जिन श्री राधा जू की शरण साक्षात श्री कृष्ण भी हैं)। [4]
राज के भरोसे कोऊ, काज के भरोसे कोऊ,
साज के भरोसे कोऊ, कोऊ वर वानी के। [1]
देह के भरोसे कोऊ, गेह के भरोसे कोऊ,
नेह के भरोसे कोऊ, कोऊ गुरु ज्ञानी के॥ [2]
नाम के भरोसे कोऊ, ग्राम के भरोसे कोऊ,
दाम के भरोसे कोऊ, कीरति-कहानी के।
ब्रज है भरोसे सदा स्याम ब्रजराज के तो,
“फलक” भरोसे एक राधा व्रजरानी के॥ [4]
- श्री नबी बख्श ‘फलक’ (मुस्लिम भक्त)
संसार में कोई राजा के भरोसे है तो कोई अपने कार्य (कर्म) के भरोसे निश्चिन्त है। कोई अपने साज-श्रृंगार के भरोसे है, कोई सुरीली वाणी के। [1]
कोई अपने शरीर के भरोसे है अथवा बलिष्ठ शरीर के भरोसे बैठा है तो कोई भवन-कोठी के भरोसे। किसी को अपने प्रेम या स्नेही पर भरोसा है और किसी को ज्ञानी गुरु पर। [2]
इसी प्रकार कोई अपने नाम से ही आश्वस्त है तो कोई ग्राम से, जबकि किसी को धन पर विश्वास है तो किसी को अपने यश-कीर्ति की कथा पर। [3]
ब्रजधाम सदैव ब्रजराज श्री कृष्ण पर भरोसा रहा है, परंतु नबी बख्श "फलक' कहते हैं कि उन्हें तो एक मात्र ब्रजरानी श्री राधिका जू पर ही भरोसा है (जिन श्री राधा जू की शरण साक्षात श्री कृष्ण भी हैं)। [4]

