यस्या अगम्यतां श्रुतयः सांख्ययोगा वेदान्तानि ब्रह्मभावं वदन्ति ।
न यां पुराणानि विदन्ति सम्यक् तां राधिकां देवधात्रीं नमामः ॥
- अथर्ववेद, श्रीराधिका तापनीयोपनिषत् (5)
हम सब श्रुतियाँ, सांख्ययोग-शास्त्र तथा उपनिषद् जिन परब्रह्म की अभिन्न स्वरूपा की अगम्यता का प्रतिपादन करती हैं, जिनको स्वरूपतः भली प्रकार पुराण भी नहीं जानते, उन देवताओं की पालिका श्रीराधिकाजी को हम नमस्कार करती हैं ।
न यां पुराणानि विदन्ति सम्यक् तां राधिकां देवधात्रीं नमामः ॥
- अथर्ववेद, श्रीराधिका तापनीयोपनिषत् (5)
हम सब श्रुतियाँ, सांख्ययोग-शास्त्र तथा उपनिषद् जिन परब्रह्म की अभिन्न स्वरूपा की अगम्यता का प्रतिपादन करती हैं, जिनको स्वरूपतः भली प्रकार पुराण भी नहीं जानते, उन देवताओं की पालिका श्रीराधिकाजी को हम नमस्कार करती हैं ।

