श्री स्वामी सन्मुख भये, महा अभै पद देत ।
अंग संग नित्य बिहार में, ताहि छिन करि लेत ॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी
जब कोई जीव ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी के शरणागत होता है, तो वह महा अभय पद को प्राप्त हो जाता है। स्वामीजी उसी क्षण उसे अपना बनाकर, नित्य विहार रस में प्रिया-प्रियतम का अंग-संग प्रदान करते हैं।
अंग संग नित्य बिहार में, ताहि छिन करि लेत ॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी
जब कोई जीव ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी के शरणागत होता है, तो वह महा अभय पद को प्राप्त हो जाता है। स्वामीजी उसी क्षण उसे अपना बनाकर, नित्य विहार रस में प्रिया-प्रियतम का अंग-संग प्रदान करते हैं।

