मारौ मोहि तारौ कोउ, सब दुतकारहु गाऊं ।
श्री वृंदावन छांड़ि कै, अनत न कित हूँ जाऊँ ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (14)
भले ही कोई मुझे मारे अथवा पार लगाये, सब को दुतकार के मैं सदा वृंदावन के गुणों को गाऊँगा। मेरी यही प्रतिज्ञा है कि मैं श्रीधाम वृंदावन को त्याग कर कहीं और नहीं जाऊँ।
श्री वृंदावन छांड़ि कै, अनत न कित हूँ जाऊँ ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (14)
भले ही कोई मुझे मारे अथवा पार लगाये, सब को दुतकार के मैं सदा वृंदावन के गुणों को गाऊँगा। मेरी यही प्रतिज्ञा है कि मैं श्रीधाम वृंदावन को त्याग कर कहीं और नहीं जाऊँ।

