आन भटकना सब मिटी गहि रसिकन रस रीति - श्री प्रियादास (शुक संप्रदाय के रसिक भक्त)

आन भटकना सब मिटी गहि रसिकन रस रीति - श्री प्रियादास (शुक संप्रदाय के रसिक भक्त)

आन भटकना सब मिटी, गहि रसिकन रस रीति ।
पिय प्यारी पद बनी रहे, प्रियादास की प्रीति ॥

- श्री प्रियादास (शुक संप्रदाय के रसिक भक्त)

अन्य सभी भटकन समाप्त हो गई जब से रसिकों की रसरीति को ह्रदय ने ग्रहण किया है। अब प्रियादास की यही कामना है कि पिय प्यारी के युगल चरणों में सदा प्रेम बना रहे।