कृष्ण प्रेम मातो रहे, धरे ना काहु शंक - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (56)

कृष्ण प्रेम मातो रहे, धरे ना काहु शंक - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (56)

कृष्ण प्रेम मातो रहे, धरे ना काहु शंक ।
तीन गाँठ कोपीन पे, गिने इंद्र को रंक ॥

- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (56)

श्री कृष्ण के प्रेम में मतवाला भक्त किसी का भय नहीं रखता। केवल तीन गांठों वाला साधारण कौपीन धारण करते हुए भी, वह स्वर्ग के सम्राट इंद्र को भी भिखारी समझता है।