श्री राधा पद पंकज निरखि - ब्रज के दोहे

श्री राधा पद पंकज निरखि - ब्रज के दोहे

श्री राधा पद पंकज निरखि, इक टक लाल लुभाय ।
लिये महावर हाथ में, रंग भर्यौ नहिं जाय ॥

- ब्रज के दोहे

श्री राधा के चरण कमलों को निहार कर श्री कृष्ण ऐसे मोहित हो जाते हैं कि उन्हें अपलक नेत्रों से देखते रहते हैं। वे अपने हाथ में महावर लेकर उन श्री चरणों में लगाने का प्रयास करते हैं, परंतु दिव्य प्रेम से अभिभूत होकर, उनके अंगों में ऐसा रोमांच उत्पन्न हो जाता है कि वे महावर लगाने में असमर्थ हो जाते हैं।