(सवैया)
भाग्य उदे जब होएं हमारे, श्री ब्रजधाम में वास करेंगे। [1]
श्री ब्रजराज के दर्शनामृत से, पापों के पुंज का नाश करेंगे॥ [2]
ब्रजरज में हम लोटेंगे अहर्निश, हृदे में प्रेम विकाश करेंगे। [3]
श्याम सलोने से नेह बढ़ायेंगे, नेह से नेह की आस करेंगे॥ [4]
- ब्रज के सवैया
जब हमारा भाग्य उदय होगा, तब हम भी ब्रज धाम में वास करेंगे। [1]
ब्रजराज श्रीकृष्ण के दर्शनामृत से अपने पापों के पुंज का नाश करेंगे। [2]
हम दिन-रात ब्रज की धूल में लोटेंगे, जिससे हमारे हृदय में भी प्रेम खिलेगा। [3]
हमारा श्यामसुंदर के प्रति प्रेम दिन-प्रतिदिन गहरा होगा, और इस प्रेम से हम और अधिक प्रेम की आशा करेंगे। [4]
भाग्य उदे जब होएं हमारे, श्री ब्रजधाम में वास करेंगे। [1]
श्री ब्रजराज के दर्शनामृत से, पापों के पुंज का नाश करेंगे॥ [2]
ब्रजरज में हम लोटेंगे अहर्निश, हृदे में प्रेम विकाश करेंगे। [3]
श्याम सलोने से नेह बढ़ायेंगे, नेह से नेह की आस करेंगे॥ [4]
- ब्रज के सवैया
जब हमारा भाग्य उदय होगा, तब हम भी ब्रज धाम में वास करेंगे। [1]
ब्रजराज श्रीकृष्ण के दर्शनामृत से अपने पापों के पुंज का नाश करेंगे। [2]
हम दिन-रात ब्रज की धूल में लोटेंगे, जिससे हमारे हृदय में भी प्रेम खिलेगा। [3]
हमारा श्यामसुंदर के प्रति प्रेम दिन-प्रतिदिन गहरा होगा, और इस प्रेम से हम और अधिक प्रेम की आशा करेंगे। [4]

