चरण कमल चित लाई कै गाऊँ गुन सुख-रासि - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (52)

चरण कमल चित लाई कै गाऊँ गुन सुख-रासि - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (52)

चरण कमल चित लाई कै, गाऊँ गुन सुख-रासि ।
आनंद-निधि कृपाल नित्य, पाऊँ प्रेम प्रकासि ॥

- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (52)

अपने चित्त को श्री प्रिया-प्रियतम के चरण कमलों में लगाकर उनके गुणों का गान करूँ, जो सुखों की राशि हैं। ऐसे आनंद निधि और नित्य कृपा बरसाने वाले श्री चरणों से अपने हृदय को प्रेम रूपी धन से प्रकाशित करूँ।