(राग मलार)
हमारी हेली स्वामिनी परमदयाल ।
देत सदा सन्मान श्याम को, कीरती कुंवरि कृपाल ॥ [1]
सेव्य सलोनी भानुनंदिनी, सेवक नंद को लाल ।
सरसमाधुरी पाँय पलोटत, प्रीतम होत निहाल ॥ [2]
- श्री सरस माधुरी
हमारी स्वामिनी (श्री राधा) परम दयालु हैं । कीर्ति कुमारी अत्यंत कृपालु हैं एवं सदा श्री श्यामसुन्दर को सम्मान देती हैं । [1]
भानुनंदिनी श्री राधा ही सदा सेव्य हैं और नंदलाल श्री कृष्ण उनके सेवक हैं । श्री सरस माधुरी जी कहते हैं कि उनके चरणों को दबाकर (उनकी चरण सेवा करके) प्रीतम श्री कृष्ण निहाल हो जाते हैं । [2]
हमारी हेली स्वामिनी परमदयाल ।
देत सदा सन्मान श्याम को, कीरती कुंवरि कृपाल ॥ [1]
सेव्य सलोनी भानुनंदिनी, सेवक नंद को लाल ।
सरसमाधुरी पाँय पलोटत, प्रीतम होत निहाल ॥ [2]
- श्री सरस माधुरी
हमारी स्वामिनी (श्री राधा) परम दयालु हैं । कीर्ति कुमारी अत्यंत कृपालु हैं एवं सदा श्री श्यामसुन्दर को सम्मान देती हैं । [1]
भानुनंदिनी श्री राधा ही सदा सेव्य हैं और नंदलाल श्री कृष्ण उनके सेवक हैं । श्री सरस माधुरी जी कहते हैं कि उनके चरणों को दबाकर (उनकी चरण सेवा करके) प्रीतम श्री कृष्ण निहाल हो जाते हैं । [2]

