कठिन मनोरथ मन उठे, को पुरनि करे आनि ।
कृपा करेंगी लाड़िली, दीन दुखी मोहि जानि ॥
- श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (106)
मेरे मन में प्रेम भरे दुर्लभ मनोरथ उत्पन्न हो रहे हैं, उन्हें कैसे पूरा करूँ? कोई उपाय नहीं सुझता, केवल श्री लाड़लीजी ही अब कृपा करेंगी मुझे दीन-दुखिया समझकर।
कृपा करेंगी लाड़िली, दीन दुखी मोहि जानि ॥
- श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (106)
मेरे मन में प्रेम भरे दुर्लभ मनोरथ उत्पन्न हो रहे हैं, उन्हें कैसे पूरा करूँ? कोई उपाय नहीं सुझता, केवल श्री लाड़लीजी ही अब कृपा करेंगी मुझे दीन-दुखिया समझकर।

