श्रीस्वामी हरिदास भजि, सिद्ध होइ सब काम ।
चतुरदास यह भाव भजि, निरखे स्यामास्याम ॥
- श्री चतुर दास जी, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (11)
श्री चतुरदास जी अपने मन को समझाते हुए कहते हैं, “हे मन, तुम श्री स्वामी हरिदास जी महाराज का भजन करो (अर्थात् अखंड नित्य विहार उपासना करो), जिससे समस्त इच्छाएँ स्वतः ही पूर्ण हो जाएँगी एवं निश्चित ही श्यामा कुंजबिहारी का अवलोकन प्राप्त होता है।”
चतुरदास यह भाव भजि, निरखे स्यामास्याम ॥
- श्री चतुर दास जी, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (11)
श्री चतुरदास जी अपने मन को समझाते हुए कहते हैं, “हे मन, तुम श्री स्वामी हरिदास जी महाराज का भजन करो (अर्थात् अखंड नित्य विहार उपासना करो), जिससे समस्त इच्छाएँ स्वतः ही पूर्ण हो जाएँगी एवं निश्चित ही श्यामा कुंजबिहारी का अवलोकन प्राप्त होता है।”

