सखीभाव धारण करै, जब पहुँचे निज धाम ।
नित्यविहार इकरस जहाँ, जन छौना अभिराम ॥
- श्री गुरुछौना जी
श्यामा श्याम की सखी भाव को धारण करके ही साधक निज़धाम तक पहुँच सकता है जहां अनन्य रसिक जन अविचल नित्य विहार रस का पान करते हैं ।
नित्यविहार इकरस जहाँ, जन छौना अभिराम ॥
- श्री गुरुछौना जी
श्यामा श्याम की सखी भाव को धारण करके ही साधक निज़धाम तक पहुँच सकता है जहां अनन्य रसिक जन अविचल नित्य विहार रस का पान करते हैं ।

