आये तैं हर्षे नहीं, गये करें नहिं सोग - श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (399)

आये तैं हर्षे नहीं, गये करें नहिं सोग - श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (399)

आये तैं हर्षे नहीं, गये करें नहिं सोग ।
ललित किशोरी कें सदा, गौर श्याम संयोग ॥

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (399)

कोई व्यक्ति या वस्तु आए, हमें कोई हर्ष नहीं; कोई व्यक्ति या वस्तु छिन जाए, हमें कोई शोक नहीं क्योंकि हम तो गौर-श्यामल वर्ण वाले श्यामा कुंज बिहारी के नित्य विहार में ही अपने मन को सदाकाल लगाये हुए हैं।​