नित्यविहार अखंड है, निज वृंदावन धाम ।
‘बाई कुशाली’ गुरु कृपा, तहाँ अचल विश्राम ॥
- श्री कुशाली बाई जी (शुक संप्रदाय की रसिक भक्त)
निज धाम श्री वृंदावन में अखंड नित्य विहार रस है, जहाँ जीव को गुरु कृपा से अचल विश्राम प्राप्त होता है।
‘बाई कुशाली’ गुरु कृपा, तहाँ अचल विश्राम ॥
- श्री कुशाली बाई जी (शुक संप्रदाय की रसिक भक्त)
निज धाम श्री वृंदावन में अखंड नित्य विहार रस है, जहाँ जीव को गुरु कृपा से अचल विश्राम प्राप्त होता है।

