यह करुणा की बान लखि मो हिय अति हुलसात - ब्रज के दोहे

यह करुणा की बान लखि मो हिय अति हुलसात - ब्रज के दोहे

यह करुणा की बान लखि, मो हिय अति हुलसात ।
बनत बनत बन जायगी, मेरी बिगड़ी बात ॥

- ब्रज के दोहे

हे प्रभु, आपका परम करुणामय स्वभाव जानकर मेरा ह्रदय उल्लास से भर उठता है और मन में एक उमंग उठती है कि बनते-बनते मेरी भी बिगड़ी एक दिन अवश्य ही बन जाएगी (अर्थात् मुझे भी भगवद्प्राप्ति हो जाएगी)।