(राग सारंग)
विलसत रंग महल सुखरासी।
स्यामा-स्याम केलि अवलोकत, आनंद निधि हरिदासी। [1]
विविध केलि रस रंग माधुरी, छवि अद्भुत प्रकासी।
श्री विपुल विहारिन सरस रसिक वर, मंद मधुर मृदुहासी। [2]
- श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (169)
निधिवन में विराजित “रंग महल” में प्रिया-प्रियतम सुखपूर्वक विलस रहे हैं। आनंद की निधि, श्री हरिदासी सखी, श्यामा-श्याम की केली का नित्य ही अवलोकन कर रही हैं। [1]
विविध प्रकार से केली रस बरस रहा है, और प्रिया-प्रियतम की रूप माधुरी का अद्भुत प्रकाश हो रहा है। रसिक आचार्य श्री विपुल देव, श्री विहारिन देव, श्री सरस देव, और श्री रसिक देव, सखी रूप में विराजते हुए, युगल की मधुर मुस्कान और मनमोहक केली से मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। [2]
विलसत रंग महल सुखरासी।
स्यामा-स्याम केलि अवलोकत, आनंद निधि हरिदासी। [1]
विविध केलि रस रंग माधुरी, छवि अद्भुत प्रकासी।
श्री विपुल विहारिन सरस रसिक वर, मंद मधुर मृदुहासी। [2]
- श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (169)
निधिवन में विराजित “रंग महल” में प्रिया-प्रियतम सुखपूर्वक विलस रहे हैं। आनंद की निधि, श्री हरिदासी सखी, श्यामा-श्याम की केली का नित्य ही अवलोकन कर रही हैं। [1]
विविध प्रकार से केली रस बरस रहा है, और प्रिया-प्रियतम की रूप माधुरी का अद्भुत प्रकाश हो रहा है। रसिक आचार्य श्री विपुल देव, श्री विहारिन देव, श्री सरस देव, और श्री रसिक देव, सखी रूप में विराजते हुए, युगल की मधुर मुस्कान और मनमोहक केली से मंत्रमुग्ध हो रहे हैं। [2]

