मूँड मुंडायें कहा भयो, जो मन न मुंडायौ - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (163)

मूँड मुंडायें कहा भयो, जो मन न मुंडायौ - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (163)

मूँड मुंडायें कहा भयो, जो मन न मुंडायौ।
श्रीबिहारीदास सति भाइ बिनु, संतोष न आयौ ॥

- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (163)

यदि मन की वासनाओं को नहीं मुड़ाया, तो केवल मूँड के मुड़ाने से कोई लाभ नहीं क्योंकि बिना सच्चे भाव के, मन में संतोष आ ही नहीं सकता ।