राधा वल्लभ लाल को, दुर्लभ दरसन पाय ।
सुल्लभ श्रीवन कृपा तें, हूल्यौ अंगन माय ॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (68)
श्री राधा वल्लभ लालजी के दुर्लभ दर्शन केवल श्रीधाम वृंदावन की कृपा से सुलभ होते हैं, जिनके दर्शन पाकर शरीर प्रेम से रोमांचित हो उठता है।
सुल्लभ श्रीवन कृपा तें, हूल्यौ अंगन माय ॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (68)
श्री राधा वल्लभ लालजी के दुर्लभ दर्शन केवल श्रीधाम वृंदावन की कृपा से सुलभ होते हैं, जिनके दर्शन पाकर शरीर प्रेम से रोमांचित हो उठता है।

