मिलन अनूठी प्यारे तिहारी - श्री जुगलप्रिया जी

मिलन अनूठी प्यारे तिहारी - श्री जुगलप्रिया जी

मिलन अनूठी प्यारे तिहारी॥ [1]
कहनि अनूठी, करनि अनूठी, रहनि अनूठी पै बलिहारी ।
चलनि अनूठी मुरनि अनूठी, झुकनि अनूठी लागत प्यारी॥ [2]
जो समझौ सो सबहि अनूठी, चितवनि हँसनि मधुर बसकारी ।
'युगल प्रिया' पिय परम अनूठे, तुम सम हो तुम कुंज बिहारी ॥ [3]

- श्री युगल प्रिया

हे प्यारे, आपका मिलन अद्वितीय है। [1]

आपकी कहानी, करनी और रहनी सब अनूठी हैं, जिन पर मैं बार-बार बलिहारी जाती हूँ। आपका चलना, मुड़ना और झुकना अत्यंत मनमोहक और निराला है। [2]

आपका सब कुछ ही अलौकिक है । चितवन और हँसन भी मधुर हैं जो दूसरों को वशीभूत कर लेती है । युगल प्रिया कहती हैं कि मेरे प्रिय श्री कुंज बिहारी की सभी बातें अनोखी हैं और उनके समान अन्य कोई नहीं है। [3]