प्रेम पारखी जो मिले, ताको करि मनुहार ।
तिन सों प्रिया प्रीतम मिले, सब सुख दीजे वार ॥
- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (30)
जब कोई प्रेम का पारखी, अनन्य रसिक संत मिले तो उनका प्रेम से आदर सत्कार करो, क्योंकि श्री प्रिया प्रियतम ऐसे प्रेमी महात्माओं की कृपा से मिलते हैं। इसलिए उन पर अपने समस्त सुखों को न्यौछावर कर देना चाहिए।
तिन सों प्रिया प्रीतम मिले, सब सुख दीजे वार ॥
- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (30)
जब कोई प्रेम का पारखी, अनन्य रसिक संत मिले तो उनका प्रेम से आदर सत्कार करो, क्योंकि श्री प्रिया प्रियतम ऐसे प्रेमी महात्माओं की कृपा से मिलते हैं। इसलिए उन पर अपने समस्त सुखों को न्यौछावर कर देना चाहिए।

