एक हि तन मन प्राण है, दोउ रस प्रतिपाल - ब्रज के दोहे

एक हि तन मन प्राण है, दोउ रस प्रतिपाल - ब्रज के दोहे

एक हि तन मन प्राण है, दोउ रस प्रतिपाल ।
कुंजविहारिणी लाडिली, कुंजबिहारी लाल ॥

- ब्रज के दोहे

श्री कुंजविहारिणी लाडिली (श्री राधा) एवं कुंज विहारी लाल (श्री कृष्ण) का एक ही तन है, एक ही मन एवं एक ही प्राण है एवं दोनों ही रस को प्रदान करने वाले हैं ।