धन धन वृंदावन की कोयल कारी ।
जिन बागन में रहै सदाई, बोलत है मतवारी ॥ [1]
बोलत आवै सबद सुनावैं, बैठे आम की डारी ।
अभयराम येहू बड़भागिन, स्यामा स्याम की प्यारी ॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (63)
श्री वृंदावन धाम की कोयलें धन्य हैं, जो सदा वृंदावन के बागों में रहकर मतवारी होकर बोलती हैं। [1]
वे आम के वृक्षों की डालियों पर बैठकर मधुर स्वर में गान करती रहती हैं। श्री अभयराम कहते हैं, ये कोयलें बहुत भाग्यशाली हैं क्योंकि वे श्री श्यामा-श्याम की अति प्रिय हैं। [2]
जिन बागन में रहै सदाई, बोलत है मतवारी ॥ [1]
बोलत आवै सबद सुनावैं, बैठे आम की डारी ।
अभयराम येहू बड़भागिन, स्यामा स्याम की प्यारी ॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (63)
श्री वृंदावन धाम की कोयलें धन्य हैं, जो सदा वृंदावन के बागों में रहकर मतवारी होकर बोलती हैं। [1]
वे आम के वृक्षों की डालियों पर बैठकर मधुर स्वर में गान करती रहती हैं। श्री अभयराम कहते हैं, ये कोयलें बहुत भाग्यशाली हैं क्योंकि वे श्री श्यामा-श्याम की अति प्रिय हैं। [2]

