यस्या अङ्के विलुण्ठन् - राधिका तापनीय उपनिषद (9)

यस्या अङ्के विलुण्ठन् - राधिका तापनीय उपनिषद (9)

यस्या अङ्के विलुण्ठन् कृष्णदेवो गोलोकाख्यं नैव सस्मार धामपदम् ।
सांशा कमला शैलपुत्री तां राधिका शक्तिधात्रीं नमामः ॥

- अथर्ववेद, श्रीराधिका तापनीयोपनिषत् (9)

जिनके अंक में लेटे हुए श्रीकृष्णचन्द्र अपने शाश्वत विहार-स्थान गोलोक का स्मरण तक नहीं करते, श्री लक्ष्मीजी और श्रीपार्वतीजी जिनकी अंशरूपा हैं, उन समस्त शक्तियों की अधिष्ठात्री श्रीराधिकाजी को हम प्रणाम करते हैं ।