रोग भोग सुख देह दुख, कै जाडौ कै घाम ।
श्रीनागरीदास परपंच तजि, भजि श्रीस्यामा स्याम ॥
- श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (14)
देह से संबंधित सुख-दुख, रोग-भोग, और सर्दी-गर्मी स्वाभाविक रूप से आते-जाते रहते हैं। अतः हे नागरीदास, इन सभी प्रपंचों को भलीभाँति त्याग कर, श्री युगल (श्यामा-श्याम) के भजन में ही नित्य मन लगाओ।
श्रीनागरीदास परपंच तजि, भजि श्रीस्यामा स्याम ॥
- श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (14)
देह से संबंधित सुख-दुख, रोग-भोग, और सर्दी-गर्मी स्वाभाविक रूप से आते-जाते रहते हैं। अतः हे नागरीदास, इन सभी प्रपंचों को भलीभाँति त्याग कर, श्री युगल (श्यामा-श्याम) के भजन में ही नित्य मन लगाओ।

