साहेब सिर ताज हुआ नन्दजू के आप पूत - ताज बेगम

साहेब सिर ताज हुआ नन्दजू के आप पूत - ताज बेगम

(कवित्त)
साहेब सिर ‘ताज' हुआ नन्दजू के आप पूत,
मारी जिन असुर करी काली सिर छाप है। [1]
कुन्दन पुर जाय के सहाय करी भीषम की,
रुकमिनी को टेक रखी लगी नहीं खाप है॥ [2]
पाण्डव की पच्छ करी द्रौपदी बढ़ाय चीर,
दीन से सुदामा की मेटी जिन ताप है। [3]
निहच करि शोधि लेहु ज्ञानी गनवान बेगि,
जग में अनूप मित्र कृष्ण का मिलाप है॥ [4]

- ताज़ बेगम (ताज़ बीबी)

स्वयं भगवान श्रीकृष्ण, नंद के पुत्र के रूप में इस संसार में प्रकट हुए। उन्होंने राक्षसों का वध किया और कालिया नाग के सिर पर अपनी छाप छोड़ी। [1]

उन्होंने कुंदनपुर जाकर भीष्म की सहायता की। उन्होंने रुक्मिणी का समर्थन किया और उन्हें समस्त प्रकार की समस्याओं से बचाया। [2]

उन्होंने पांडवों का सदा साथ दिया और द्रौपदी के वस्त्रों का विस्तार कर उसकी रक्षा की। उन्होंने दीन सुदामा के दुखों का हरण किया। [3]

हे ज्ञानी एवं गुणवान जीवों, अपने शुद्ध विवेक से जल्दी ही यह निश्चय कर लो कि इस संसार में श्रीकृष्ण के समान अतुलनीय मित्र कोई और नहीं है। [4]