उर नहीं खरक सनेह की, मुख नहीं राधा-श्याम।
वृन्दावन हित देह नर, तोषौ यौं बेकाम॥
- श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (25)
यदि हृदय प्रेम से विहीन है और मुख में “राधा श्याम” नाम नहीं है, तो हे वृंदावन दास, यह मानव जीवन व्यर्थ है।
वृन्दावन हित देह नर, तोषौ यौं बेकाम॥
- श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (25)
यदि हृदय प्रेम से विहीन है और मुख में “राधा श्याम” नाम नहीं है, तो हे वृंदावन दास, यह मानव जीवन व्यर्थ है।

