जिनको मन हरिपद कमल - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (97)

जिनको मन हरिपद कमल - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (97)

जिनको मन हरिपद कमल, निशिदिन भ्रमर समान ।
नारायण तिनसों मिले, कबूँ न होवै हान ॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (97)

जिनका मन श्री हरि के चरण कमलों में, भ्रमर के समान, नित्य प्रति चिपका रहता है, उनका संग करने से जीव को कभी भी हानि नहीं होती।