बिहारिनि तेरेई रंग रंगी ।
तेरेई हित में नित्य लडैति, तेरेई प्रेम पगी ॥ [1]
तेरे सुख में सुख पावत, तेरेई काम जगी।
तेरेई कृपा ते ललित किसोरी, हँसि हँसि कंठ लगी ॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (20)
हे मेरी प्यारी श्री बिहारीनी जू (श्री राधा), मैं तो सदा से तुम्हारे ही रंग में रंगी हुई हूँ । तुम्हारे पक्ष में ही सदा खड़ी होकर, तुम्हारे ही प्रेम में डूबी हुई हूँ । [1]
तुम्हारे ही सुख में सुखी होती हूँ एवं अब तुम्हारी ही सेवा मुझे मनमोहक लगती है। श्री ललित किशोरी कहती हैं कि तुम्हारी ही कृपा से हंस-हंस कर सदा तुम्हें गले लगी रहती हूँ । [2]
तेरेई हित में नित्य लडैति, तेरेई प्रेम पगी ॥ [1]
तेरे सुख में सुख पावत, तेरेई काम जगी।
तेरेई कृपा ते ललित किसोरी, हँसि हँसि कंठ लगी ॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (20)
हे मेरी प्यारी श्री बिहारीनी जू (श्री राधा), मैं तो सदा से तुम्हारे ही रंग में रंगी हुई हूँ । तुम्हारे पक्ष में ही सदा खड़ी होकर, तुम्हारे ही प्रेम में डूबी हुई हूँ । [1]
तुम्हारे ही सुख में सुखी होती हूँ एवं अब तुम्हारी ही सेवा मुझे मनमोहक लगती है। श्री ललित किशोरी कहती हैं कि तुम्हारी ही कृपा से हंस-हंस कर सदा तुम्हें गले लगी रहती हूँ । [2]

