जो गावहिं सुमरहिं सदा, मन बच विपिन विलास।
ते पावहिं सुख सहज ही, श्री वृन्दावन वास॥
- श्री माधुरी दास, वृंदावन माधुरी (92)
जो व्यक्ति मन और वचनों से सदा वृंदावन की लीलाओं का यशोगान और सुमिरन करता है, वह सहज ही आनंद और श्री वृंदावन धाम में वास प्राप्त कर लेता है।
ते पावहिं सुख सहज ही, श्री वृन्दावन वास॥
- श्री माधुरी दास, वृंदावन माधुरी (92)
जो व्यक्ति मन और वचनों से सदा वृंदावन की लीलाओं का यशोगान और सुमिरन करता है, वह सहज ही आनंद और श्री वृंदावन धाम में वास प्राप्त कर लेता है।

