सुनि पुकार प्रिया महारानी ।
लई बसाय जान मोहि अपनी, श्रीमत वृंदावन रजधानी ॥ [1]
दीनन की दुख हरण दयानिधि, लोक प्रसिद्ध विरद वरदानी ।
सरसमाधुरी स्वामिनि मेरी, दया कृपा करूणा की खानी ॥ [2]
- श्री सरस माधुरी
मेरी महारानी श्री राधारानी ने मेरी पुकार सुन ली है। इसलिए उन्होंने मुझे अपना मानकर, अपनी राजधानी श्री धाम वृंदावन में बसाया है। [1]
वे दीन जनों के दुखों का हरण करने वाली, दया की निधि हैं, जो अपनी कृपा के लिए विश्व विख्यात हैं। श्री सरस माधुरी कहते हैं कि मेरी स्वामिनी श्री राधा दया, कृपा, और करुणा की साक्षात समुद्र हैं। [2]
लई बसाय जान मोहि अपनी, श्रीमत वृंदावन रजधानी ॥ [1]
दीनन की दुख हरण दयानिधि, लोक प्रसिद्ध विरद वरदानी ।
सरसमाधुरी स्वामिनि मेरी, दया कृपा करूणा की खानी ॥ [2]
- श्री सरस माधुरी
मेरी महारानी श्री राधारानी ने मेरी पुकार सुन ली है। इसलिए उन्होंने मुझे अपना मानकर, अपनी राजधानी श्री धाम वृंदावन में बसाया है। [1]
वे दीन जनों के दुखों का हरण करने वाली, दया की निधि हैं, जो अपनी कृपा के लिए विश्व विख्यात हैं। श्री सरस माधुरी कहते हैं कि मेरी स्वामिनी श्री राधा दया, कृपा, और करुणा की साक्षात समुद्र हैं। [2]

