मथुरा प्रभु ने ब्रजवास दियो - श्री वल्लभ दास

मथुरा प्रभु ने ब्रजवास दियो - श्री वल्लभ दास

(सवैया)
मथुरा प्रभु ने ब्रजवास दियो, कोऊ वास नहीं जासौं सुथरा। [1]
सुथरा यमुना जलस्नान कियो, मिटिये जमदूतन को खतरा॥ [2]
खतरा तजि श्री गोपाल भजो, अब ‘बल्लभ’ नेम यही पकरा। [3]
पकड़ा हिय में हरिनाम सदा, भजि सो मन श्री मथुरा मथुरा॥ [4]

- श्री वल्लभ दास

मथुरा के प्रभु ने हमें बहुत कृपा करके ब्रजवास प्रदान किया है, जिसके समान कोई परम-पावन वास नहीं है। [1]

यमुना के पवित्र जल में स्नान करने से यमदूतों का भय सदा के लिए समाप्त हो जाता है। [2]

समस्त भय को त्यागकर श्री गोपाल की भक्ति में लीन रहना है। श्री वल्लभदास जी कहते हैं कि अब मैंने केवल इसी नियम का ही पालन करना है। [3]

हरि का नाम दृढ़ता से हृदय में बसाकर, हे मन, निरंतर जपो—“श्री मथुरा, मथुरा।” [4]